​आतंकवाद के विरुद्ध अमरीका का दूसरा बड़ा हमला

इन दिनों विश्व में आतंकवाद ने पूरे जोर-शोर से अपने पैर फैला रखे हैं और आई.एस. तथा अन्य आतंकवादी संगठनों द्वारा ‘शत्रु ठिकानों’ पर हमलों के दौरान पारम्परिक हथियारों के अलावा विषैली गैसों तक का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस्लामिक स्टेट (आई.एस.) ने अनेक देशों में अपने अड्डïे बना लिए हैं जहां इसके सदस्य लगातार भारी नरसंहार कर रहे हैं।
ऐसे देशों में अफगानिस्तान भी शामिल है जहां 12 अप्रैल को राजधानी काबुल में आई.एस. के विस्फोट में एक अमरीकी सिपाही सहित 5 लोगों की मृत्यु और दर्जनों लोग गम्भीर रूप से घायल हो गए। आई.एस. व अल कायदा जैसे आतंकी गिरोहों की ऐसी ही गतिविधियों को देखते हुए 12 अप्रैल को अमरीकी नेतृत्व वाली गठबंधन सेनाओं ने सीरिया में ‘पूर्वी डीर-अल-जोर’ प्रांत में आई.एस. के विषैली गैस डिपो पर हमला कर दिया।
इसके अगले ही दिन 13 अप्रैल को अमरीका ने अफगानिस्तान में पूर्वी नांगरहार प्रांत के अचिन जिले के मोमांद डारा इलाके में आई.एस. के ठिकाने पर अब तक का सबसे बड़ा गैर परमाणु बम हमला किया जिसमें 94 आतंकी मारे गए और आई.एस. का एक गहरी सुरंग में बनाया हुआ अड्डा तबाह हो गया। इस हमले में प्रयुक्त जी.बी.यू-43/ बी. एम.ओ.ए.बी. बम को ‘मदर ऑफ ऑल बम’ कहा जाता है। अमरीकी वायु सेना के प्रवक्ता के अनुसार :
‘‘1000 किलो वजनी यह बम अब तक के सबसे बड़े पारंपरिक बमों में से एक था। इसका इस्तेमाल खालिस तौर पर अफगानिस्तान में आई.एस. के आतंकवादियों के विरुद्ध अफगानिस्तान सेना के सहयोग से गत मार्च में शुरू किए गए अभियान के सिलसिले में रणनीतिक निर्णय के अंतर्गत किया गया और यह सही निशाने पर हमला करने का सही मौका था।’’ हालांकि समाचार आने तक इस हमले में किसी नागरिक आबादी को क्षति नहीं पहुंची परंतु इस कार्रवाई को लेकर अनावश्यक विवाद शुरू होता दिखाई दे रहा है तथा अमरीका द्वारा आई.एस. के खात्मे के लिए शुरू किए गए इस अभियान पर अफगानिस्तान में ही परस्पर विरोधी आवाजें सुनाई दे रही हैं।
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के कार्यालय के अनुसार, ‘‘अफगानी और विदेशी सेनाओं ने आपस में मिल कर पूरी सावधानी के साथ इस अभियान को चलाया ताकि कोई भी निर्दोष न मारा जाए।’’ इसके विपरीत अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद कारजेई ने अफगानिस्तान की धरती पर इस कार्रवाई को अमानवीय करार देते हुए अमरीका पर नए और खतरनाक हथियारों के परीक्षण के लिए अफगानिस्तान की धरती का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। यही नहीं, तालिबान ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि ‘‘इसे किसी भी दशा में उचित नहीं ठहराया जा सकता।’’
आतंकवादियों के विरुद्ध अमरीकी कार्रवाई के मामले में तालिबानियों का ऐसा कहना गलत है। आखिर निर्दोषों को मारने वालों (जिनमें तालिबानी भी शामिल हैं) के विरुद्ध हमले को कैसे गलत कहा जा सकता है। बहरहाल, इस बारे निष्पक्ष प्रेक्षकों का कहना है कि ‘‘डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने चुनावी वादे के अनुरूप ही आई.एस.आई.एस. के खात्मे के लिए अभियान शुरू किया है। ट्रम्प के चुनाव प्रचार अभियान के दौरान जब उनसे आई.एस. से निपटने संबंधी उनकी योजना के बारे में पूछा जाता था तो उनका यही उत्तर होता था कि यह एक सीक्रेट है।’’
अब राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रम्प ने आई.एस. के खात्मे का अपना वादा पूरा करने के लिए ही यह सबसे बड़ा कदम उठाया और आई.एस. के आतंकवादियों के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दे कर विश्व को संदेश दे दिया है कि अब वह आई.एस. के खात्मे की अपनी पूर्व घोषणा को पूरा करने के मामले में रुकने वाले नहीं हैं। हालांकि अब भी असंगठित गिरोहों के इस तरह के हमले जारी रहेंगे परंतु सरकार प्रायोजित आतंकवाद समर्थकों के लिए अमरीकी कार्रवाई एक डर का माहौल अवश्य पैदा करेगी।

नि:संदेह इस कार्रवाई से न सिर्फ ट्रम्प मजबूत होकर उभरे हैं बल्कि उन्होंने आतंकवाद से निपटने के बारे में अपनी योजना भी स्पष्टï कर दी है। इससे आतंकवाद समर्थकों को झटका लगेगा व मध्य पूर्व के देशों की ही नहीं, समस्त विश्व की राजनीतिक स्थिति पर भी असर पड़ेगा।
—विजय कुमार
सौजन्य – पंजाब केसरी।

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