लीला ईश्वर और यमराज की


प्रदीप पंत
वह कस्टम अधिकारी के सामने जाकर खड़े हो गए। कस्टम अधिकारी ने उनसे पूछा, ‘आप कौन?’

‘पहचाना नहीं? हम ईश्वर हैं।’ वह बोले।

‘अच्छा-अच्छा, ईश्वरदास? वर्षों बाद मिल रहे हैं न, इसलिए पहचान नहीं पाया।’

‘वर्षों बाद नहीं पहली बार।’ उन्होंने डपटते हुए कहा, ‘हम ईश्वरदास नहीं ईश्वर हैं, ‘साक्षात ईश्वर।’

‘ओह, ईश्वर।’ कस्टम अधिकारी बोला, ‘रोज मंदिर जाता हूं। कभी-कभी दिन में दो बार। रोज पूजा-अर्चना कराता हूं, चढ़ावा चढ़ाता हूं। सोचता रहा हूं कि कभी तो ईश्वर के दर्शन हो जाएं। हो गए तो जीवन भी धन्य हो जाएगा। और आज देख रहा हूं, आप सहसा प्रकट हो गए। सचमुच जीवन धन्य हो गया।’

‘अब ज्यादा बातें मत बनाओ और सीधे हमारे साथ चलो।’ उन्होंने आदेश दिया।

‘कहां? मंदिर में?’ कस्टम अधिकारी ने पूछा।

‘नहीं, हमारे साथ स्वर्ग में चलना होगा।’

कस्टम अधिकारी एकाएक घबरा उठा। उसके हाथ-पैर कांपने लगे। आंखों के आगे मानो अंधेरा छा गया। उसकी घिग्घी बंध गई। किसी तरह वह बोला, ‘अभी से स्वर्ग में क्यों? अभी तो मेरी बेटी मेडिकल की पढ़ाई कर रही है, बेटा इंजीनियरिंग में। पत्नी सहित दोनों मुझ पर निर्भर हैं। किसी मामूली सरकारी विभाग में होता मैं तो बेटी-बेटे को मेडिकल और इंजीनियरिंग की शिक्षा दिलाने की सोच भी नहीं पाता, वो तो अच्छा हुआ कि कस्टम में नौकरी लगी और पिछले कुछ वर्षों से कस्टम अधिकारी हूं। यहां अच्छी कमाई हो जाती है। इस कमाई से लंबा डोनेशन देकर दोनों बच्चों का दाखिला करवाया। पत्नी का लॉकर हीरे-जवाहरात और सोने के गहनों से भर दिया। सैकड़ों साड़ियां खरीदवा दी। लेकिन अब आप कह रहे हैं, स्वर्ग चलो। ये कैसा अन्याय है, पालनहार। मैंने बिला नागा प्रतिदिन आपकी पूजा- अर्चना की, लेकिन…’

ईश्वर ने टोका, ‘इसी पूजा-अर्चना के कारण हम तुम्हें रियायत देते हुए स्वर्ग ले जा रहे हैं, वरना सीधे नर्क भिजवा देते जहां तुम्हें कभी कोड़े लगाए जाते, कभी खौलता हुआ तेल तुम पर उड़ेला जाता तो कभी तुम्हारी देह पर बिच्छू छोड़ दिए जाते।’

कस्टम अधिकारी बुरी तरह से सिहर उठा। उसने सुन तो रखा था कि नर्क में भांति-भांति की यातनाएं सहनी पड़ती हैं, लेकिन उसने कोड़े खाने, खौलता तेल उड़ेले जाने, शरीर पर बिच्छू छोड़े जाने की कभी कल्पना भी नहीं की थी। उसने सोचा कि अब इस संसार से जाना है तो गनीमत है कि स्वर्ग में जाने का सुअवसर मिल रहा है, लेकिन उसकी समझ में नहीं आया कि जब औरों को ले जाने यमराज आते हैं तो उसे ले जाने स्वयं ईश्वर क्यों चले आए? कस्टम अधिकारी ने उत्सुकतावश यह प्रश्न ईश्वर के सामने उठा दिया।

उत्तर में ईश्वर ने जेब से स्मार्टफोन निकाला और कस्टम अधिकारी के सामने एक वीडियो खोलते हुए कहा, यह वीड़ियो आजकल बहुत वायरल हो रहा है। चुपके से हमने इसे बना लिया था। इसमें हमारी और यमराज की बातचीत का एक अंश।’

यमराज- ‘सर, आजकल आप हमें धरती पर केवल गरीबों के पास ही भेजते हैं। कोई नाराजगी है क्या?’

ईश्वर- ‘देखो, स्वर्ग का खजाना दिनों-दिन कम होता जा रहा है। यहां के निवासियों में असंतोष है। दूसरी ओर तुम हो कि जब धरती पर अमीरों के पास जाते हो तो उन्हें घसीटकर यहां लाने के बजाय उनसे लंबी रकम लेकर उन्हें वहीं सकुशल छोड़ यहां लौट आते हो। यहां तक तो ठीक, पर तुम ये रकम स्वर्ग के खजाने में नहीं जमा करते बल्कि खुद हड़प लेते हो।’

वीडियो बंद हो गया। ईश्वर ने स्मार्टफोन जेब में रखते हुए कस्टम अधिकारी से कहा, ‘मिल गया न तुम्हें अपने प्रश्न का उत्तर?’

‘हां, उत्तर मिल गया, भाग्य विधाता। जितनी भी रकम आप चाहें, मैं देने को तैयार हूं, बस मुझे इसी धरती पर रहने दीजिए।’ कहते हुए कस्टम अधिकारी ने अपनी तिजोरी खोल दी। ईश्वर ने तिजोरी से नोटों के असंख्य बंडल उठाए और चलते बने। जाते-जाते बोले, ‘हम स्त्री- धन को हाथ लगाना पाप समझते हैं, इसलिए लॉकर में रखे तुम्हारी पत्नी के हीरे-जवाहरात और स्वर्णाभूषण नहीं मांग रहे।’

और ईश्वर चले गए तो कस्टम अधिकारी ने चैन की सांस ली। फिर अपने से ही कहा, ‘जान बची तो लाखों पाए। लाखों क्या पद पर रहते हुए करोड़ों पाएंगे। पदोन्नति होने पर और ज्यादा पाएंगे।’

लेकिन अभी हफ्ता भी नहीं बीता था कि कस्टम अधिकारी के सामने भैंसे पर बैठे यमराज आ प्रकट हुए। वह फिर घबराया, फिर नर्वस हुआ, लेकिन किसी तरह बोला, ‘महाराज अब आपका कैसे आना हुआ?’

‘क्या मतलब? ‘कड़क आवाज में यमराज ने पूछा।

‘अभी कुछ ही दिन पहले तो ईश्वर आए थे।’ कहते हुए कस्टम अधिकारी ने ईश्वर से हुए सारे वार्तालाप और करोड़ों की नकदी सौंपने का जिक्र किया।

यमराज ने अट्‌टहास करते हुए कहा, ‘होगा कोई नकली ईश्वर। जिसे तुम धरती वाले लोग ‘इंस्पेक्टर’ कहते हो, वैसा ही कोई। तुम्हें बता दे कि असली ईश्वर यानी हमारे मालिक धरती पर कभी प्रकट नहीं होते। लोगों को वहां ऊपर ले जाने की जिम्मेदारी उन्होंने हमें सौंप रखी है। तो चलो हमारे साथ या फिर सोना-चांदी हमारे हवाले करो।’ इतना सुनकर कस्टम अधिकारी मूर्च्छित हो गया। यमराज घबरा उठे कि कहीं कोई पुलिस वाला उन्हें हिरासत में न ले लें। उन्होंने इधर-उधर देखा और भैंसे से उतर तेजी से भाग निकले। भैंसा दूसरी दिशा में भागा, अपने मालिक के घर की ओर जहां से यमराज उसे किराये पर लाए थे।

सौजन्य – दैनिक भास्कर।

Advertisements

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s