रोटियां गोल कैसे बनती है

प्रदीप कुमार गुप्ता 

जुबानी जमा खर्च के बाहर-

रोटियां गोल कैसे बनती है ,

तेज आंच के अदहन पे चवल कैसे पकता है

छुनमुनाती कढ़ाही में उबला आलू कैसे 

जायके का सफर तय करता है

पसीने की बूंदे कैसे कलदार सिक्कों में ढल जाते हैं

हुनर अब ये जानना है हमें

दोहा, गजल, काव्य, कथा, नाटक, फिल्म, सोशल

मीडिया — सब लफ्जों की जुगाली है

अब ये हो न सकेगा,

कि तेरे दर पे आऊँ – सुदामा – कहाऊँ

बेहतर है अपना – कान्हा- खूद बन जाऊँ।

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