11 अप्रैल की मुख्य खबरें 

 होप इन द चैलेंज्ड डेमोक्रेसी’, का विमोचन 

पूर्व कानून मंत्री और कांग्रेस नेता डॉक्टर अश्वनी कुमार की किताब ‘होप इन द चैलेंज्ड डेमोक्रेसी’ (Hope in a challenged democracy) का विमोचन 10 अप्रैल 2017 को किया गया।

इस मौके पर डॉक्टर अश्विनी कुमार ने कहा हमें फ्रीडम ऑफ स्पीच और निजता के अधिकार के बीच में बैलेंस बनाकर चलना होगा और यह आज की सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि ऐसा पोलिटिकल कल्चर जिस में विपक्ष को दुश्मन समझा जाए, लोकतंत्र के लिए नुकसानदायक है। मौजूदा राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में हमें सोचना होगा कि किस तरह से ऊंचे सिद्धांतों और सम्मानजनक बातों के साथ राजनीति की जाए।

डॉ कुमार अप्रैल 2016 में अपनी सेवानिवृत्ति से पहले राज्यसभा के लगातार 14 वर्ष तक सदस्य रहे थे।

भारतीय सर्वेक्षण की 250वीं जयंती पर डॉ. हर्षवर्धन ने “नक्‍शे” पोर्टल की शुरूआत की

केंद्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने भारतीय सर्वेक्षण (एसओआई) की 250वीं जयंती के अवसर पर 10 अप्रैल 2017 को नई दिल्ली में एक नए वेब पोर्टल “नक्‍शे” की शुरूआत की।

भारतीय सर्वेक्षण वर्ष 1767 में अपनी स्‍थापना से ही भूभाग या टोपोग्राफी सहित प्राकृतिक और मानव निर्मित भौगोलिक विशेषताओं वाले टोपोग्राफिक नक्‍शे या ओपन सीरीज़ मैप्स (ओएसएन) तैयार कर रहा है, जो राष्ट्रीय मानचित्र नीति-2005 की पुष्‍टि में है। इन ओएमएन मानचित्रों को भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अनुरूप आधारयुक्‍त उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण प्रक्रिया के माध्यम से 1: 50,000 पैमाने पर पीडीएफ प्रारूप में “नक्‍शे” वेब पोर्टल से नि:शुल्‍क डाउनलोड के लिए उपलब्ध कराया गया है।

भारतीय सर्वेक्षण, देश की एक प्रमुख मानचित्रण एजेंसी है, जो इस वर्ष अपनी 250 वीं जयंती मना रही है। भारतीय सर्वेक्षण की उत्पत्ति वर्ष 1767 में हुई थी। यह भारत का सबसे पुराना वैज्ञानिक विभाग है और दुनिया में सबसे पुराने सर्वेक्षण प्रतिष्ठानों में से एक है। देश के वैज्ञानिक सर्वेक्षणों के मैपिंग प्रतिष्‍ठान की स्‍थापना 19वीं सदी में आज ही के दिन अर्थात 10 अप्रैल 1802 को द ग्रेट ट्रिगनोमेट्रिक सर्वे (जीटीएस) के साथ जाने-माने सर्वेक्षक कर्नल लम्बटन और सर जॉर्ज एवरेस्ट द्वारा की गई थी।

भारतीय सर्वेक्षण (एसओआई) ने देश के हरेक हिस्से का सर्वेक्षण किया और नक्‍शा बनाया है और इन नक्‍शों ने भारत के राष्ट्र निर्माण की गाथा में एक अमूल्य भूमिका निभाई है। इसके अलावा ये आधुनिक भारत के लगभग सभी प्रमुख विकासात्‍मक गतिविधियों की नींव डालने में महत्वपूर्ण रहे हैं।

कोलसन व्हाइटहेड के ‘द अंडरग्राउंड रेलरोड’ को पुलित्जर पुरस्कार मिला:

कोलसन व्हाइटहेड के लोकप्रिय उपन्यास द अंडरग्राउंड रेलरोड को फिक्शन श्रेणी के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला है। इस उपन्यास में एक भागे हुए गुलाम की कहानी है और कल्पना और क्रूर वास्तविकता का एक मिश्रण है। इस घोषणा के साथ ही यह किताब साल 2016 के साहित्य जगत की एक बड़ी घटना बन गई है।

ओपरा विनफ्रे बुक क्लब ने भी इस किताब को क्रिटिकल फेवरेट चुना था और इसे नेशनल बुक अवॉर्ड से भी नवाजा गया था। पिछले 20 साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब फिक्शन के लिए एक ही किताब को नेशनल बुक अवॉर्ड और पुलित्जर दोनों से नवाजा गया है।

लिन नोटाज के स्वीट को ड्रामा श्रेणी के लिए पुरस्कार दिया गया है। उन्हें दूसरी बार पुलित्जर मिला है। जीवनी (आत्मकथा की श्रेणी के लिए हिशम मेटर की किताब द रिटर्न) फादर्स, संस एंड द लैंड इन बिटविन को पुलित्जर मिला है।

मौत की सजा देने में चीन पहले स्थान पर: एमनेस्टी इंटरनेशनल

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ऐमनिस्टी इंटरनैशनल की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2016 के दौरान दुनियाभर में सजा-ए-मौत के मामलों में 37 फीसद तक की कमी आई। एक ओर जहां 2015 के मुकाबले 2016 में फांसी के मामलों में 37 प्रतिशत तक की कमी आई, वहीं चीन ने दुनिया के बाकी सभी देशों के मुकाबले सबसे ज्यादा संख्या में लोगों को मौत की सजा दी।

आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के बाकी सभी देशों को मिलाकर फांसी के जितने मामले हुए, उनसे ज्यादा लोगों को चीन ने अकेले ही फांसी दी। ईरान में मौत की सजा दिए जाने के चलन में थोड़ी कमी देखी गई। ऐमनिस्टी इंटरनैशनल ने मंगलवार को मौत की सजा पर 2016 के लिए अपनी वैश्विक समीक्षा रिपोर्ट जारी की। दुनिया में इसका प्रतिशत गिरा है और इसका सबसे बड़ा कारण यह रहा कि ईरान ने पिछले साल कम लोगों को यह सजा दी।

फांसी के मामलों से जुड़ी ज्यादातर जानकारियां चीन में ‘स्टेट सीक्रिट्स’ रखी जाती हैं। माना जाता है कि चीन में हर साल हजार से भी ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है। चीन के आंकड़ों को हटा दें, तो 2016 में दुनिया भर में करीब 1,032 लोगों को फांसी की सजा हुई। इनमें से सबसे ज्यादा, यानी करीब 856 फांसियां मध्यपूर्वी और उत्तरी अफ्रीका के देशों में हुईं। अमेरिका के अंदर पिछले साल फांसी की सजा के मामले ऐतिहासिक रूप से सबसे कम पाए गए। पिछले एक दशक में पहली बार अमेरिका फांसी देने के मामले में दुनिया के सबसे टॉप 5 देशों में शामिल नहीं था।

इससे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को आगे के लिए काफी उम्मीद दिख रही है। 2016 में अमेरिका ने करीब 20 लोगों को मौत की सजा दी, लेकिन इनमें से ज्यादातर को फांसी पर चढ़ाकर नहीं, बल्कि जहरीला इंजेक्शन देकर मारा गया। अमेरिका में अभी भी 2,832 अपराधी ऐसे हैं, जिन्हें मौत की सजा दिए जाने पर अदालत की मुहर लग चुकी है।

केन्द्र ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत राज्यों को करीब 23,500 करोड़ रुपये जारी किये:

 ग्रामीण विकास मंत्रालय ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) के तहत इस वित्तीय वर्ष के लिए पहली किश्त के रूप में राज्यों को लगभग 23,500 करोड़ रुपये जारी किए हैं। जारी राशि में 31 मार्च, 2017 तक सभी लंबित देयताएं शामिल हैं। यह जल संरक्षण उपायों पर प्राथमिकता काम को सुनिश्चित करने के लिए भी है।

सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत जल संरक्षण और जल प्रबंधन कार्यों पर काफी जोर दे रही है। सभी राज्यों को यह सुनिश्चित करने के लिए सलाह दी गई है कि उपयुक्त तकनीकी और वैज्ञानिक जांच के साथ जहां भी आवश्यक हो, ऐसे कार्यों को किया जाए।

जल संसाधन मंत्रालय के सहयोग से, मिशन जल संरक्षण दिशानिर्देश को विकसित किया गया है और इन्हें राज्यों के साथ साझा भी किया गया है। जल संसाधन मंत्रालय द्वारा 2264 जल-तनावग्रस्त ब्लाकों की सूची तैयार की गई है। ये ब्लाक 21 राज्यों के 324 जिलों में स्थित हैं।

राज्यों के लिए एक हालिया संवाद में, मंत्रालय ने राज्यों को यह सलाह दी है कि वे प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन गतिविधियों पर 65 प्रतिशत से कम खर्च न करें।

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