​नहीं मानते लातों के भूत 

पाकिस्तान से और उम्मीद भी क्या की जा सकती है? आतंकवाद को बढ़ावा देने का मामला हो या मानवाधिकारों को कुचलने का, पाक हर जगह अव्वल आता है। ताजा मामला तो और भी चौंकाने वाला है। भारत के एक पूर्व नौसैनिक कुलभूषण जाधव को ईरान से अगवा करके पाकिस्तान ने गुपचुप मौत की सजा सुना दी। आरोप ये कि जाधव भारतीय जासूस है। किसी को पता नहीं कि जाधव के खिलाफ कब ट्रायल चला?
गवाह कौन थे? सजा कब सुनाई? आतंककारियों को शह और पनाह देने के मामले में दुनिया के सामने रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद पाक इस तरह की नापाक करतूतें करके अपना बचाव करना चाहता है। दुनिया को यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि भारत उसके यहां जासूस भेज रहा है। जाधव को जिस तरह ईरान से पकड़कर गुपचुप मौत की सजा सुनाई, उसकी भारत के साथ एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी निंदा की है।
भारत सरकार के साथ तमाम राजनीतिक दलों ने भी पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया है। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने संसद में साफ कह दिया कि जाधव को फांसी हुई तो पाकिस्तान को इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। पाक मीडिया ने भी अपनी सरकार को आगाह किया है। दूसरी तरफ पाक प्रधानमंत्री नवाज शरीफ हमेशा की तरह गीदड़ भभकियों पर उतर आए हैं। शरीफ कह रहे हैं कि पाकिस्तान सेना किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार है।
शरीफ पाक को शांतिप्रिय देश बताने से भी नहीं चूक रहे। दुनिया जानती है, पाकिस्तान कितना शांतिप्रिय है। दुनिया के सबसे खतरनाक आतंककारी ओसामा बिन लादेन को अपने सैन्य इलाके में पनाह देने वाला पाक जब शांति की बात करता है तो हंसी के साथ गुस्सा भी आता है। जाधव को मौत की सजा सुनाकर पाकिस्तान ने अपनी काली करतूत फिर दुनिया के सामने रख दी है।
भारत को अपने तरीके से इस घटना पर पाकिस्तान को दबाव में लेना चाहिए। दुनिया के दूसरे देशों को भी उसकी हकीकत बतानी चाहिए। वह लातों का भूत है लिहाजा बातों से मान जाएगा, उम्मीद कम है। फिर भी हमें प्रयास करते रहना चाहिए। साथ ही पाकिस्तान के स्थायी इलाज की तरफ भी गंभीरता से विचार करना चाहिए। हर बार मुंह की खाने के बावजूद वह बाज नहीं आना चाहता। ऐसी सूरत में एक ही रास्ता बचता है और वह ये कि वो जैसी भाषा समझता है, जवाब उसी भाषा में दिया जाना चाहिए।

सौजन्य – पत्रिका

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