चुनाव आयोग ने जारी किए ईवीएम एफ ए क्यू (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

निर्वाचन आयोग ने ईवीएम को अविश्वसनीय बताये जाने के आरोपों का खंडन किया है। चुनाव आयोग ने 09 अप्रैल 2017 को कहा कि ईवीएम मजबूत एवं छेड़छाड़ की आशंका से रहित होते हैं और यहां तक कि निर्माण के दौरान भी इनसे हेरफेर नहीं की जा सकती।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) की विश्वसनीयता को लेकर विपक्ष के जोर शोर से सवाल खड़ा करने पर आयोग ने बताया कि अपना विचार रखने के लिये उसने ‘अक्सर पूछे जाने वाले सवालों’ (एफएक्यू) की एक सूची सार्वजनिक की है।

ईवीएम के साथ छेड़खानी करने का क्या अर्थ है? 

टैम्परिंग या छेड़खानी का अर्थ है, कंट्रोल यूनिट (सीयू) की मौजूदा माइक्रो चिप्स पर लिखित साफ्टवेयर प्रोग्राम में बदलाव करना या सीयू में नई माइक्रो चिप्स इंसर्ट करके दुर्भावनापूर्ण साफ्टवेयर प्रोग्राम शुरू करना और बैलेट यूनिट में प्रेस की जाने वाली ऐसी ‘कीज़’ बनाना, जो कंट्रोल यूनिट में वफादारी के साथ परिणाम दर्ज न करती हो।

क्या ईसीआई-ईवीएम को हैक किया जा सकता है?

नहीं। ईवीएम मशीनों के एम 1 (माडल 1) का विनिर्माण 2006 तक पूरा कर लिया गया था और कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा किए जा रहे दावों के विपरीत एम 1 मशीनों की सभी अनिवार्य तकनीकी विशेषताओं को ऐसा बनाया गया था कि उन्हें हैक न किया जा सके।

2006 में तकनीकी मूल्यांकन समिति की सिफारिशों के आधार पर 2006 के बाद और 2012 तक विनिर्मित ईवीएम के एम 2 माडल में अतिरिक्त सुरक्षा विशेषता के रूप में एन्क्रिप्टिड फार्म यानी कूट रूप में प्रमुख कोड्स की डायनामिक कोडिंग शामिल की गई, जिसके फलस्वरूप बैलेट यूनिट से कंट्रोल यूनिट में की-प्रेस संदेश हस्तांतरित करना संभव हुआ। इसमें प्रत्येक की-प्रेस की रीयल टाइम सेटिंग भी शामिल है, ताकि तथाकथित दुर्भावनापूर्ण सीक्वेंस की गई की-प्रेस सहित की-प्रेस की सीक्वेंसिंग का पता लगाया जा सके और रैप्ड किया जा सके।

इसके अतिरिक्त ईसीआई-ईवीएम कम्प्यूटर नियंत्रित नहीं है, वे स्टैंड अलोन यानी स्वतंत्र मशीनें हैं और वे इंटरनेट और/या किसी अन्य नेटवर्क के साथ किसी भी समय बिंदु पर कनेक्टिड नहीं हैं। अतः किसी रिमोट डिवाइस के जरिए उन्हें हैक करने की कोई गुंजाइश नहीं है।

क्या विनिर्माताओं द्वारा ईसीआई-ईवीएम में कोई हेराफेरी (मैनीपुलेशन) की जा सकती है?

संभव नहीं है। साफ्टवेयर की सुरक्षा के बारे में विनिर्माता के स्तर पर कड़ा सुरक्षा प्रोटोकोल लागू किया गया है। ये मशीनें 2006 से अलग अलग वर्षों में विनिर्मित की जा रही हैं। विनिर्माण के बाद ईवीएम को राज्य और किसी राज्य के भीतर जिले से जिले में भेजा जाता है। विनिर्माता इस स्थिति में नहीं हो सकते कि वे कई वर्ष पहले यह जान सकें कि कौन सा उम्मीदवार किस निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ेगा और बैलेट यूनिट में उम्मीदवारों की सीक्वेंस क्या होगी।

इतना ही नहीं, प्रत्येक ईसीआई-ईवीएम का एक सीरियल नम्बर है और निर्वाचन आयोग ईवीएम-ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करके अपने डेटा बेस से यह पता लगा सकता है कि कौन सी मशीन कहां पर है. अतः विनिर्माण के स्तर पर हेराफेरी की कोई गुंजाइश नहीं है।

क्या सीयू में चिप के भीतर ट्रोजन होर्स को घुसाया जा सकता है?

ईवीएम में वोटिंग की सीक्वेंस निम्नांकित अनुसार ट्रोजन होर्स के इंजेक्शन की आशंका को समाप्त करती है। निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए कड़े सुरक्षा उपाय फील्ड में ट्रोजन होर्स का प्रवेश असंभव बना देते हैं।

जब कंट्रोल यूनिट में कोई बैलेट की प्रेस की जाती है, तो सीयू, बीयू को वोट रजिस्टर करने की अनुमति देती है और बीयू में की-प्रेस होने का इंतजार करती है। इस अवधि के दौरान सीयू में सभी कीज़ उस वोट के कास्ट होने की समूची सीक्वेंस पूरा होने तक निष्क्रिय हो जाती हैं।

किसी मतदाता द्वारा कीज़ (उम्मीदवारों के वोट बटन) में से कोई एक की दबाने के बाद बीयू उस की से संबंधित जानकारी सीयू को ट्रांसफर करती है। सीयू को डेटा प्राप्त होता है और वह तत्क्षण  बीयू में एलईडी लैंप की चमक के साथ उसकी प्राप्ति स्वीकार करती है। सीयू में बैलेट को सक्षम करने के बाद केवल ‘प्रथम प्रेस की गई की’ को सीयू द्वारा सेंस और स्वीकार किया जाता है।

क्‍या ईसीआई-ईवीएम के साथ भौतिक रूप से छेड़छाड़ की जा सकतीहै या बिना किसी के ध्‍यान में आए उनके संघटकों को बदला जा सकता है?

ईसीआई-ईवीएम के पुराने मॉडलों एम1 एवं एम2 में विद्यमान सुरक्षा विशेषताओं के अतिरिक्‍त 2013 के बाद बनाई गई नई एम3 ईवीएम में टेम्‍पर डिटेक्‍शन एवं सेल्‍फ डाइगनोस्टिक्‍स जैसी अतिरिक्‍त विशेषताएं हैं। टेम्‍पर डिटेक्‍शन विशेषता के कारण जैसे ही कोई व्‍यक्ति मशीन खोलने का प्रयास करता है, ईवीएम निष्‍क्रिय हो जाता है. सेल्‍फ डाइगनोस्टिक्‍स विशेषता के कारण जब भी ईवीएम मशीन को स्विच ऑन किया जाता है, यह पूरी तरह मशीन की जांच करता है। इसके हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर में किसी भी परिवर्तन का इससे पता लग जाएगा।

उपरोक्‍त विशेषताओं के साथ नये मॉडल एम3 का एक प्रोटोटाइप जल्‍द ही तैयार हो जाएगा। एक तकनीकी विशेषज्ञ समिति इसकी जांच करेगी और फिर निर्माण आरंभ हो जाएगा। उपरोक्‍त अतिरिक्‍त विशेषताओं एवं नई प्रौद्योगिकीय उन्‍नतियों के साथ एम3 ईवीएम की खरीद के लिए सरकार द्वारा लगभग 2000 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

क्‍या इसीआई-ईवीएम विदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हैं?

इस प्रकार की गलत सूचना एवं जैसा कि कुछ लोग आरोप लगाते हैं, के विपरीत भारत विदेशों में बने किसी ईवीएम का उपयोग नहीं करता। ईवीएम का निर्माण स्‍वदेशी तरीके से सार्वजनिक क्षेत्र की दो कंपनियों यथा-भारत इलेक्‍ट्रोनिक्‍स लिमिटेड, बेंगलुरु एवं इलेक्‍ट्रोनिक्‍स कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा किया जाता है। सॉफ्टवेयर प्रोग्राम कोड इन दोनों कंपनियों द्वारा आं‍तरिक तरीके से तैयार किया जाता है न कि उन्‍हें आउटसोर्स किया जाता है।

अमेरिका एवं यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों ने ईवीएम को क्‍यों नहीं अपनाया है और कुछ देशों ने यह प्रणाली क्‍यों त्‍याग दी है?

कुछ देशों ने अतीत में इलेक्‍ट्रोनिक मतदान के साथ प्रयोग किया है। इन देशों में मशीनों के साथ समस्‍या यह थी कि वे कंप्‍यूटर द्वारा नियंत्रित थे एवं नेटवर्क से जुड़े थे, जिसके कारण उनमें हैकिंग किए जाने की आशंका थी जिससे इसका उद्देश्‍य पूरा नहीं हो पाता था। इसके अतिरिक्‍त, उनकी सुरक्षा, हिफाजत एवं संरक्षण से संबंधित कानूनों एवं विनियमनों में पर्याप्‍त सुरक्षा के उपायों की कमी थी। कुछ देशों में अदालतों ने केवल इन्‍हीं कानूनी आधारों की वजह से ईवीएम के उपयोग को स्‍थगित कर दिया।

भारतीय ईवीएम एक स्‍वतंत्र प्रणाली है जबकि अमेरिका, नीदरलैंड, आयरलैंड एवं जर्मनी के पास प्रत्‍यक्ष रिकार्डिंग मशीने थीं। भारत ने हालांकि आंशिक रूप से ही सही, कागज लेखा परीक्षा निशान (पेपर ऑडिट ट्रेल) लागू किया है। दूसरे देशों के पास लेखा परीक्षण निशान नहीं थे। उपरोक्‍त सभी देशों में मतदान के दौरान सोर्स कोड को बंद कर दिया जाता है। भारत के पास भी मेमो‍री से जुड़े क्‍लोज्‍ड सोर्स और ओटीपी है।

वीवीपीएटी सक्षम मशीनों की क्‍या स्थिति है?

ईसीआई ने मतदाता सत्‍यापित कागज लेखा परीक्षा निशान (वीवीपीएटी) का उपयोग करते हुए 107 विधानसभा क्षेत्रों एवं 9 लोकसभा चुनाव क्षेत्रों में चुनावों का संचालन किया है। वीवीपीएटी के साथ-साथ एम2 एवं नई पीढ़ी एम3 ईवीएम का उपयोग मतदाताओं के भरोसे एवं पारदर्शिता को बढ़ाने की दिशा में एक सकारात्‍मक योजना है।

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