लोकसभा में काराधान कानून (संशोधन) विधेयक-2017 में पारित

लोकसभा में कराधान कानून (संशोधन) विधेयक- 2017 06 अप्रैल 2017 को ध्वनिमत से पारित हो गया। विधेयक में सीमा शुल्क अधिनियम, 1962, सीमा प्रशुल्क अधिनियम,1975, केन्द्रीय उत्पाद शुल्क,1944 और वित्त अधनियम, 2001 तथा 2005 में संशोधन तथा कुछ कानूनों को निरस्त करने का प्रावधान किया गया है। इससे पहले विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त राज्यमंत्री संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि वस्तु एवं सेवा कर(जीएसटी) देश को ऐतिहासिक परिवर्तन की दिशा में ले जाने की दिशा में बड़ा कदम है।

उन्होंने जीएसटी पर सदस्यों की कुछ आशंकाओं के संबंध में कहा कि एक जुलाई को पूरे देश में जीएसटी की व्यवस्था लागू होने के बाद अगर किसी तरह की कोई व्यावहारिक दिक्कत होती है तो उसका जीएसटी परिषद में मिल बैठकर समाधान कर लिया जाएगा।

मंत्री ने कहा, “संसद द्वारा जीएसटी विधेयक पारित होने के बाद केंद्रीय उत्पाद कर कुछ ही उत्पादों तक सीमित रह जाएगा। यही कारण है कि कराधान कानून में संशोधन जरूरी हो गया था।” उन्होंने कहा, “सरकार आगामी एक जुलाई से नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है।”

सीमा शुल्क अधिनियम के संशोधन के तहत गोदामों को भी सीमा शुल्क के दायरे में शामिल करना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी आयातकर्ता को अपने माल को सीमा शुल्क केंद्र से गोदामों तक ले जाते वक्त प्रस्तावित एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर न देने की जरूरत पड़े।

सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम संशोधन का उद्देश्य आयातित वस्तुओं पर एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर मुआवजा उपकर लगाना है। वित्तीय अधिनियम 2001 में संशोधन का उद्देश्य केवल तंबाकू व कच्चे तेल पर लेवी लगाना है। विधेयक का उद्देश्य चीनी उपकर अधिनियम 1982 तथा जूट निर्माण उपकर अधिनियम 1983 जैसे कानूनों को निरस्त करना है।

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने विधेयक पर चर्चा की शुरुआत की थी।

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