उदास है उसरी झरना!

प्रदीप कुमार गुप्ता, संस्कृतिकर्मी

ग़िरिडीह जिला मुख्यालय एक ऐतिहासिक पर्यटक स्थल रहा है, 

जहाँ सत्यजीत रे, सुधीर खास्तगीर, जगदीश चंद्र बसु, अरविंदो घोष, रविंद्र नाथ टैगोर जैसी हस्ती आ चुकी है

कवींद्र रविंद्र ने लिखा था-

‘चोलो जाबो देखते उसरी झरना

आज उसरी झरना उदास है’

ऊंचाई से गिरता जलप्रवाह पत्थरों से टकरा कर रजत कणों की तरह उड़ रहें हैं,और इस झीनी रजत पट के पार छितिज की लालिमा ओझल होने को है मानो तपती दुपहरी की बैचैनी के बीच किसी ने चन्दन का शीतल लेप, पूजा से लौटी मां की ममता का शीतल मृदुल छुअन का अहसास,ग़िरिडीह जिसके माथे अबरख की बिंदिया, कोख मे कोयले की काली चट्टानें,छाती पे इस्पात के कारखाने हैं उसी धूल धूसरित ग़िरिडीह में जैनियों के तीर्थस्थल पारसनाथ की पर्बत श्रृं खला की गोद मे उसरी झरना का मनोहारी मनोरम दृश्य है 40 फीट की ऊंचाई से गिरने वाले इस झरने का उदगम उसरी नदी है

पर्वत की ऊंचाई से गिरने वाली तीन धाराएं नीचे पत्थरों से टकरा कर तुमुल निनाद, कलकल शोर करती रुई के फाहे की तरह उड़ती भिंगोती सराबोर करती है,झरने के आस् पास दूर दूर तक फैले जंगल अद्भुत रहस्य रोमांच सिहरन की दुनिया सामने रखते हैं ,दूर दूर तक फैली बालुका राशि, पानी आये कहां से जाये कहाँ  जाये रे….पर्यटक् ऐसी दृस्यवालियां देखने के लिये खिंचे चले आते हैं विशेष कर नंवबर-जनवरी महीने में-यंहां पिकनिक, फुसालो मनाने देश विदेश,के साथ साथ बिहार बंगाल ओड़िसा एवम सथानीय पर्यटकों का हुजूम उमड़ पड़ता है.

इस जगह की रमणीयता का अनुमान इसी से लग जाता है की यहाँ कई हिंदी,भोजपुरी,खोरठा,बंगला फिल्मों,एल्बम को फिल्माया जाता है.तभी तो पर्यटन की दुनिया मे प्रसिद्ध पत्रिका टू डेज ट्रेवलर के 11 वें वार्षिक में झारखण्ड को लैंड ऑफ़ वुडेन एंड वाटरफाल कहा गया .

कभी उसरी झरना ग़िरिडीह आने वालों के लिये पर्यटन केंद्र हुआ करता था मगर आज कलकल करती उसरी झरना का दूधिया पानी पर्यटकों की आमित प्यास बुझाने को आतुर है कोई आने वाला नहीं.

आठवें दशक मे यहाँ बलात्कार की घटना हुई

नवें दशक मैं लूटमार-तब से सैलानियों का आना कम गया

और फिर ग़िरिडीह मे लौह् उद्योग लग्न शुरू हुआ और निकलना शुरू हुआ जहरीला धुआं-इसके पहले शिकार हुए वन्य प्राणी फिर हरियाली,सूंदर पत्थरों पे कालिख जमने लगे.

वक्त ऐसा आया कि उसरी झरना को एक साथ कई मार झेलनी पड़ गई-उग्रवादी,अपराधी और प्रदूषण से उसरी झरना हार गया है सैलानियों की बेरुखी ने इसका दम घोंट दिया उसरी झरना नामक पर्यटन की साजिशन हत्या की गई, इसकी हत्या करने वाले इसी शहर के लोग हैं

उसरी झरना कुदरत का अनमोल तोहफा-रहस्य रोमांच से भरपूर, यहाँ कितना भी भटको झरबेरी के बेर, आम अमरुद जामुन इमली भेलवा जैसे जंगली फल आपको भूखा नहीं रखते और न पत्थरों वाला मीठा पानी प्यासा

आज सादगी पसन्द गांव के लोग जिनकी आजीविका उसरी झरना के सदके हुआ करती थी, खामोश हैं, और उदास है उसरी झरना

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