आत्म प्रचार की ऐसी भूख इतिहास ने पहले कभी नहीं दिखी

” निजता की नुमाईश ; जरूरत या बीमारी ”

प्रदीप कुमार गुप्ता 

इस अन्धेरे समय मे हर आदमी अपने गुण-अवगुण जाहिर करने को बेताब है .
सोशल मीडीया ने समाज को सेल्फी मोड़ पे ला खड़ा किया है। आत्ममुग्ध समाज की अधपढ़ अनपढ़, पढी लिखी जमात फेसबुक, ट्विटर, मैसेंजर, वाट्सएप पर अधकल गगरी छलका रहे हैं, हाँ उस पर लाइक, कमेंट्स की बारिश होनी चाहिये, अगर वायरल सच हो जाये तो कहना ही क्या।

वीभत्स, अश्लील, जुगुत्सा फ़ैलाने वाली चीजें भी परोस् दी जाती है। लब्बोलुवाब ये कि सब नाम के, तारीफ के भूखे हैं, खुद को प्रसिद्ध करने की होड़ मची हुई है, आत्म प्रचार की ऐसी भूख इतिहास में कभी नहीं दिखी।

अब आप ही बताइये सदी के महानायक अमिताभ बच्चन को भला प्रसिद्धि की कोई कमी है क्या? इतनी शोहरत कम ही लोगों को नसीब होती है। देश का बच्चा बच्चा उन्हें जानता है मगर वे हैं कि डटे हुए हैं प्रचार के हेर मोर्चे पे- रेडियो, टीवी, प्रिंट, सोशल मीडिया सब जगह वही यहां तक की हर सरकारी तरकारी विज्ञापन मैं भी। पता नहीं आत्मप्रचार की कितनी भूख और कितना पैसा बटोरने की लालसा।

ये सोचना भी कितना विचलित करने वाला है की निजी चिठ्ठी को भी आत्मप्रचार का साधन बनाया जा सकता है तभी तो अपने नातिन और पोती को लिखी चिठ्ठी को मिडिया मे जारी कर दिया वे तो अभी शब्दो को पहचान भी नहीं पाते होंगे, मगर उनके नाम चिठ्ठी लिखी, सबको बाँट भी दी, और तो और उसकी वीडियो रिकॉडिंग करवा कर चैनलों को बंटवा भी दी क़ि लो भइये हमारी महानता के दीदार सबको करवा दो। लोगों को पता तो चलना चाहिये क़ि मैं अपनी नातिन और पोती से कितनी मोहब्बत करता हूं।

स्त्री जाति के प्रति मेरे मन मे कितने उच्च कोटि के विचार हैं, भले ही उनकी तमाम फिल्मों मे स्त्रियां दर्शकों का नेत्र भोजन बनती रही हैं और उनकी भूमिका मर्दों से कमतर रहीं और फिर उन्होंने ऐसी अद्वितीय चिठ्ठी भी नहीं लिखी जैसा नेहरू ने। 

तारीफ करने वालों का क्या वे तो अमिताभ वंदना मे जुट गये, मगर इतिहास बनाने और इतिहास में शामिल होंने की ऐसी हुलस की नहीं दुनिया को बताना जरुरी है और इसकी वाहवाही भी इस दुनिया से विदा लेने के पहले बटोरना भी, अब इसे आत्ममुगद्धता न कहा जाये तो क्या कहा जाये।

ये आत्म प्रचार की भूख ही तो है जो हर पहलू की लोकप्रयिता भुना लेना चाहती है, बाद मरने के ये सुख मिले न मिले, मिल ही नहीं सकता।

ये सही है कि आत्मप्रचार की ये भूख समूचे सेलिब्रिटी समुदाय मे मौजूद है, ऐसे में मिडियजीवी वर्ग को लगता है इसी तरह अमरता प्राप्त हो सकती है। सारे लाभ बहू प्रचारित होकर ही हासिल हो सकते हैं। इसलिये मार्केटिंग ब्रांडिंग का ये हथकंडा आजमाना जरुरी बना दिया गया है, लेकिन अमिताभ जैसी हस्ती जब इस स्तर पर उतरती है तो सोचना होगा क़ि ये जरूरत है या बीमारी………….

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