नये आरटीआई मसौदा नियमों का प्रस्ताव

सरकार ने सूचना के अधिकार के तहत दायर आवेदनों, उससे जुड़ी शिकायतों एवं अपीलों पर विचार करने के लिए नये नियमों का प्रस्ताव रखा है और जनता से 15 अप्रैल तक उनपर सुझाव देने को कहा है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण (डीओपीटी) विभाग ने जनता से प्रतिक्रिया मांगने के लिए अपनी वेबसाइट पर प्रस्तावित नियम डाले हैं जिन्हें 2012 के आरटीआई नियमों की जगह लाने का लक्ष्य है।

एक प्रमुख प्रस्ताव अब केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) को शिकायत को दूसरी अपील में बदलने की मंजूरी देता है जिसका मतलब होगा कि वह किसी आवेदक के लिए सूचना के खुलासे का आदेश दे सकता है जो आरटीआई अधिनियम के शिकायत खंड के तहत आ गया है जबकि पहले ऐसा नहीं था।

मसौदा नियमों में कहा गया, आयोग अपनी समझ में अपनी सुनवाई के दौरान शिकायत में किसी भी संशोधन की मांग को मंजूर कर सकता है जिनमें मौजूद उपचारों के समाप्त होने पर शिकायत को दूसरी अपील में बदलना शामिल है। नए नियमों के अनुसार, अपील दायर करने वाले की मौत होने पर उस आरटीआई का प्रोसेस रद्द कर दिया जाएगा यानी इस पर आगे कुछ नहीं किया जाएगा।

अपीलकर्ता अब आरटीआई आवेदन दायर करने के 135 दिनों के भीतर ही शिकायत दायर कर सकता है। शिकायत दायर करने में किसी भी तरह की देरी होने पर उसके लिए माफी का अनुरोध करना होगा। अपीलकर्ता को कमीशन को यह भी डिक्‍लेयर करना होगा कि जिन मैटर की वह शिकायत कर रहा है, उस पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है या फिर वह कोर्ट में पेंडिंग है।

सरकार रूल्स में बदलाव करने जा रही है लेकिन आरटीआई एक्टिविस्ट में इनको लेकर नाराजगी है। आरटीआई एक्टिविस्ट कोमोडोर रिटायर्ड लोकेश बतरा ने कहा- इसके लिए बहुत कम वक्त दिया गया है। इससे भी बड़ी बात यह है कि सरकार ने इस बारे में पहले से कोई इन्फॉर्मेशन भी जारी नहीं की। अब लोगों को कैसे इस बारे में पता लग सकेगा।

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005:

सूचना का अधिकार अर्थात राईट टू इन्फाॅरमेशन। सूचना का अधिकार का तात्पर्य है, सूचना पाने का अधिकार, जो सूचना अधिकार कानून लागू करने वाला राष्ट्र अपने नागरिकों को प्रदान करता है। सूचना अधिकार के द्वारा राष्ट्र अपने नागरिकों को अपनी कार्य और शासन प्रणाली को सार्वजनिक करता है।

1976 में राज नारायण बनाम उत्तर प्रदेश मामले में उच्चतम न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 19 में विर्णत सूचना के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया। अनुच्छेद 19 के अनुसार हर नागरिक को बोलने और अभिव्यक्त करने का अधिकार है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जनता जब तक जानेगी नहीं तब तक अभिव्यक्त नहीं कर सकती।

2005 में देश की संसद ने एक कानून पारित किया जिसे सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के नाम से जाना जाता है। इस अधिनियम में व्यवस्था की गई है कि किस प्रकार नागरिक सरकार से सूचना मांगेंगे और किस प्रकार सरकार जवाबदेह होगी।

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