पीएमएआई-जी के तहत 2019 तक 1 करोड़ घरों को सरकार बनाएगी

केंद्र सरकार ने 30 मार्च 2017 को कहा कि उसने 2016-17 से 2018-19 की अवधि में 1 करोड़ घरों के निर्माण के लिए 81,975 करोड़ आवंटित किये हैं। ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राम कृपाल यादव ने लोकसभा में बताया कि सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी) 2011 के अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक लगभग 4 करोड़ ग्रामीण परिवारों को घर के अभाव का सामना करना पड़ता है।

वर्ष 2011 से इंदिरा आवास योजना (IAY) और राज्य प्रायोजित आवास योजनाओं, के तहत बनाए गए घरों के लिए लेखांकन के बाद, यह अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2022 तक ‘सभी के लिए आवास’ के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए ± 10% की अनुमानित विविधता के साथ 2.95 करोड़ घरों का निर्माण किया जाना चाहिए।

पहले चरण में (2016-17 से 2018-19 तक) एक करोड़ घरों को प्रधान मंत्री आवास योजना-ग्रामीन, (पीएमएवाई-जी) के तहत निर्माण के लिए लक्षित किया गया है। सभी राज्यों / संघ शासित प्रदेशों द्वारा एसईसीसी 2011 के आंकड़ों के आधार पर स्थायी प्रतीक्षा सूचियों का सत्यापन और इन्हें अंतिम रूप देने के बाद शेष अवधि के लिए लक्ष्य (2022 तक) का निर्णय लिया जाएगा।

मंत्री ने बताया कि ‘सभी के लिए आवास’ के विभिन्न उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए पीएमएवाई-जी की योजना के ढांचे निम्न प्रारूपों को शामिल किया गया है, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:

घरों के निर्माण के लिए व्यय को पूरा करने के लिए बजटीय सहायता हेतु पर्याप्त वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता और नाबार्ड से उधार के रूप में धन प्राप्त करना।

देरी से भुगतान की समस्याओं को हल करने और कार्य पूरा होने में तेजी लाने के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के तहत सहायता का इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण।

एमआईएस-आवासफ्ट योजना के जरिए व्यापक ऑनलाइन निगरानी।

देरी को कम करने के लिए लाभार्थियों द्वारा मोबाइल ऐप- आवासअप के माध्यम से घरों के निरीक्षण और भू टैगिंग।

प्रशिक्षण, आकलन और प्रमाणन के माध्यम से प्रशिक्षित ग्रामीण मजदूरों की संख्या बढ़ाना।

दैनिक आधार पर प्रगति की समीक्षा करने के लिए राज्य और उप राज्य स्तर पर कार्यक्रम प्रबंधन इकाई (पीएमयू) की स्थापना।

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