‘यूरोपीय संघ’, 60वां जन्मदिन

ब्रिटेन को छोड़ कर यूरोपीय संघ देश के 27 नेता रोम की संधि पर हस्‍ताक्षर होने के 60 साल पूरे होने पर इटली की राजधानी रोम में मिल रहे हैं। ये देश 1957 की संधि के सम्‍मान में एक नए घोषणा पत्र पर हस्‍ताक्षर करेंगे। 1957 की संधि से यूरोपीय संघ की नींव का मार्ग प्रशस्‍त हुआ था।

यूरोपीय संघ की आधारशिला कही जाने वाली रोम-संधि की हीरक जयंती मनाने के लिए संघ के सदस्य देशों के शीर्ष नेता रोम में ही मिल-बैठेंगे। अपने शिखर सम्मेलन के दौरान वे संघ के भविष्य के बारे में एक संयुक्त घोषणा भी पारित करेंगे। माना जा रहा है कि इस घोषणा में संघ के शेष बचे 27 सदस्य देशों के बीच एकजुटता बनाए रखने लायक सर्वमान्य सही शब्दों का चयन टेढ़ी खीर बन सकता है।

यूरोपीय संघ की वर्तमान अशोभनीय दशा, उसके सदस्य देशों को जोड़ने वाले कारकों और उसके भावी स्वरूप की रूपरेखा के बारे में सभी देश एकमत नहीं हैं। कुछ देश जुड़ाव की गति को बहुत चुस्त तो कुछ दूसरे बहुत सुस्त मानते हैं। कुछ राष्ट्रवादी प्रवृत्तियों को लेकर चितित हैं, तो कुछ अपनी राष्ट्रीय प्रभुसत्ता की अक्षुण्णता के लिए चिंतित हैं।

यूरोपीय संघ का निर्माण:

यूरोपीय संघ का अस्तित्व 25 मार्च 1957 को इटली की राजधानी रोम में जिस संधि के साथ शुरू हुई, उसके बारे में कोई जनमतसंग्रह नहीं हुआ। उस समय के मतसर्वेक्षणों के अनुसार सभी छह संधिकर्ता देशों की जनता का बहुमत संधि के पक्ष में था। ये देश थे बेल्जियम, तत्कालीन पश्चिम जर्मनी, फ्रांस, इटली, लग्ज़म्बर्ग और नीदरलैंड (हॉलैंड).

द्वितीय विश्वयुद्ध का अंत हुए उस समय केवल 12 साल बीते थे। सभी देश युद्ध से जर्जर थे। वे पुनर्निर्माण के लिए समय और शांति चाहते थे। वे डर रहे थे कि कहीं ऐसा न हो कि विश्वयुद्ध के कुछ ही समय बाद त्तत्कालीन सोवियत संघ के नेतृत्व वाले पूर्वी गुट और अमेरिका के नेतृत्व वाले पश्चिमी गुट के बीच बढ़ते हुए तनावों का जो ‘शीतयुद्ध’ छिड़ गया था, वह कहीं फिर से गरमा न जाए।

युद्ध से जर्जर अर्थव्यवस्था को फिर पटरी पर लाने के लिए आपसी सहयोग अनिवार्य लग रहा था। इसलिए रोम संधि के माध्यम से दो संस्थाओं का गठन किया गया। एक का नाम था ‘यूरोपीय आर्थिक समुदाय’ (ईईसी), जिसे यूरोपीय साझा बाज़ार भी कहा जाता था, और दूसरी का नाम था ‘यूरोपीय परमाणु समुदाय’ (यूराटोम). ‘यूरोपीय आर्थिक समुदाय’ का लक्ष्य था संधिकर्ता देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं, पूंजी और श्रम का आना-जाना इस तरह सुगम बनाना, मानो सभी देश मिल कर एक ऐेसा साझा बाज़ार बन गये हैं, जहां कारोबार और व्यापार के एक ही जैसे नियम-कानून हैं।

यूरोपीय एकता की धीमी रफ्तार:

1973 तक नौ देश इस समुदाय के सदस्य बन चुके थे। 14 दिसंबर 1973 को उन्होने ‘यूरोपीय अस्मिता’ के नाम वाला एक घोषणापत्र पारित किया। इसमें ‘यूरोपीय एकता’ की गति को और तेज़ करना और उसे ’यूरोपीय संघ’ (ईयू) का रूप देना मूल लक्ष्य घोषित किया गया था। लेकिन यह गति मुख्यतः ब्रिटेन द्वारा अपने लिए नित नयी रियायतें मांगने के कारण 1980 वाले दशक के अंतिम वर्षों से पहले तेज़ नहीं हो पायी।

1987 में एक ऐसे सच्चे साझे बाज़ार की रूपरेखा पेश की गई, जिसमें – सभी सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं में समरूपता लाते हुए – निर्बाध व्यापार और कारोबार की सारी अड़चनें 1992 के अंत तक दूर कर देने का प्रावधान था। सात फ़रवरी 1992 को, नीदरलैंड के मासत्रिश्त शहर में ‘यूरोपीय समुदाय’ को किसी संघराज्य जैसे ‘यूरोपीय संघ’ का रूप देने की संधि पर विधिवत हस्ताक्षर हुए। यह नयी संधि एक नवंबर 1993 से लागू हो गई।

इसी संधि में संघ के सदस्य देशों में उस साझी मुद्रा के प्रचलन का भी लक्ष्य तय किया गया था, जिसे बाद में ‘यूरो’ के रूप में अब तक 19 सदस्य देश और भूतपूर्व युगोस्लाविया वाले मोंटेनेग्रो जैसे कुछेक गैर-सदस्य देश भी अपना चुके हैं। बाद के वर्षों में एम्सटर्डम संधि (1997), नीस संधि (2003) और लिस्बन संधि (2007) के माध्यम से यूरोपीय संघ फलता-फूलता रहा। उसमें ब्रिटेन सहित 28 देश हो गए।

यूरोपीय संघ में अलगाव के कारण:

यूरोपीय संघ की एक सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उसका अपना कोई संविधान नहीं है। इसलिए उसकी कार्यविधि में कोई परिवर्तन या कोई नया अध्याय शुरू करने से पहले एक नयी संधि करनी पड़ती है। पिछले दशक के मध्य में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति जिस्कार द’ एस्तां के नेतृत्व में एक संविधान बना तो था, पर उसके अनुमोदन के लिए हुए जनमतसंग्रह में स्वयं फ्रांस की जनता ने ही उसे ठुकरा दिया।

यही हाल नीदरलैंड में भी हुआ। अंततः संविधान को रद्दी की टोकरी के हवाले कर देना पड़ा। संधियों के साथ सुविधा यह है कि वे बार-बार की जा सकती हैं।

यूोरोपीय संघ का अंतिम स्वरूप क्या हो?

1957 की ‘यूरोपीय आर्थिक समुदाय’ वाली संधि की भूमिका में लिखा है कि इस समुदाय का लक्ष्य यूरोपीय राष्ट्रों को निरंतर करीब लाना है। बाद की सभी संधियों में भी इसी लक्ष्य को दुहराया गया है। पर, कभी यह नहीं कहा गया कि निरंतर निकटता का अंतिम स्वरूप क्या होगा? इसलिए कुछ लोग चाहते हैं कि यूरोपीय संघ के आज के राष्ट्र-राज्यों का स्थान एक दिन अमेरिका की तरह के ‘संयुक्त राज्य यूरोप’ जैसे किसी नाम वाले महादेश को ले लेना चाहिये, तो कुछ चाहते हैं कि उसे केवल एक बड़ा-सा मुक्त व्यापार क्षेत्र ही बने रहना चाहिये।

यूरोपीय संघ का प्रशासन:

यूरोपीय संघ अपने कई प्रशासनिक एवं अन्य इकाइयों द्वारा संचालित होता है, जिनमें मुख्य रूप से काउंसिल ऑफ यूरोपियन यूनियन, यूरोपियन कमीशन, एवं यूरोपियन पार्लियामेंट सबसे प्रमुख हैं।

यूरोपीय आयोग संघ के प्रमुख कार्यकारी अंग के तौर पर काम करता है और इसके दैनंदिन कामों की जिम्मेवारी इसी पर होती है जिसे इसके 27 कमीश्नर संचालित करते हैं जो 27 सदस्य राष्ट्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस आयोग के अध्यक्ष एवं सभी 27 प्रतिनिधि यूरोपीय परिषद द्वारा नामित किये जाते हैं। अध्यक्ष एवं सभी 27 प्रतिनिधियों की नियुक्ति पर यूरोपीय संसद की मंजूरी आवश्यक होती है।

यूरोपीय परिषद (यूरोपियन काउंसिल) जिसे काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के नाम से भी जाना जाता है, के आधे सदस्य संघ की न्यायिक व्यवस्था का हिस्सा होते है। न्यायिक कामों के अलावा परिषद विदेश एवं सुरक्षा नीतियों के कार्यान्वण एवं निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यूरोपीय संघ में उच्च स्तर के राजनैतिक निर्णय के लिए नेतृत्व यूरोपीय काउंसिल अर्थात यूरोपीय परिषद द्वारा किया जाता है। यूरोपीय परिषद की बैठक साल में चार बार होती है एवं इसकी अध्यक्षता उस साल यूरोपीय संघ का अध्यक्ष राष्ट्रप्रमुख करता है जिसका मुख्य कार्य यूरोपीय संघ की नीतियों के अनुरूप काम करना एवं भविष्य के लिए दिशा निर्देश जारी करना होता है।

यूरोपीय संघ की अध्यक्षता का कार्य हर सदस्य देश के जिम्मे रोटेटिंग आधार पर छह महीने के लिए आता है, इस दौरान यूरोपियन काउंसिल एवं काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स के हर बैठक की जिम्मेवारी उस सदस्य राष्ट्र पर होती है। अध्यक्षता के दौरान अध्यक्ष राष्ट्र अपने खास एजेंडों पर ध्यान देता है जिसमे आम तौर पर आर्थिक एजेंडा, यूरोपीय संघ में सुधार एवं संघ के विस्तार एवं एकीकरण के मुद्दे खास होते हैं।

यूरोपीय संघ के न्यायिक प्रक्रिया का दूसरा महत्वपूर्ण हिस्सा यूरोपीय संसद होती है। यूरोपीय संसद के सदस्य के 785 सदस्य हर पांच वर्ष में यूरोपीय संघ की जनता द्वारा सीधे चुने जाते हैं। हलांकि इन सदस्यों का चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर होता है परंतु यूरोपीय संसद में वे अपनी राष्ट्रीयता के अनुसार न बैठकर दलानुसार बैठते हैं। हर सदस्य राष्ट्र के लिए सीटों की एक निश्चित संख्या आवंटित होती है।

यूरोपीय संसद को संघ के विधायी शक्तियों के मामलों में यूरोपीय परिषद की तरह ही शक्तियां हासिल होती हैं और संसद वे संघ की खास विधायिकाओं को स्वीकृत या अस्वीकृत करने की शक्ति से लैस होते हैं। यूरोपीय संसद का अध्यक्ष न सिर्फ बाहरी मंचों पर संघ का प्रतिनिधित्व करता है बल्कि यूरोपीय संसद के स्पीकर का भी दायित्व निभाता है। अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का चुनाव यूरोपीय संसद के सदस्य हर ढा़ई साल के अंतराल पर करते हैं।

कुछेक मामलों को छोडकर ज्यादातर मामलों में न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत करने का अधिकार युरोपियन कमीशन को होता है, ऐसा ज्यादातर रेग्यूलेशन, एवं संसद के अधिनियमों द्वारा किया जाता है जिसे सदस्य राष्ट्रों को अपने अपने देशों में लागू करने की बाध्यता होती है।

Advertisements