नफरत फैलाने वाले बयान पर अब दंडात्मक कानून चाहता है विधि आयोग

हिंसा के लिए उकसाना ही घृणा फैलाने वाले बयान को तय करने का एक मात्र मापदंड नहीं हो सकता। यह बात विधि आयोग ने कही है और अनुशंसा की है कि भय और घृणा उत्पन्न करने के प्रयास को भी इसके दायरे में लाया जाना चाहिए।

विधि आयोग ने कहा कि अगर किसी बयान से हिंसा नहीं भड़कती है, लेकिन इसमें समाज के एक तबके को हाशिए पर भेजने की संभावना रहती है तो उसे नफरत फैलाने वाला माना जाना चाहिए। इसके साथ ही आयोग ने घृणास्पद बयान रोकने के लिए कानूनी प्रावधान में विस्तार करने की मांग की।

कानून मंत्रालय को सौंपे गए ‘नफरत फैलाने वाले बयान’ रिपोर्ट में विधि आयोग ने कहा कि भारतीय दंड संहिता के प्रावधानों में संशोधन करने की जरूरत है ताकि ‘नफरत फैलाने पर रोक’ और ‘कुछ मामलों में भय, बेचैनी या हिंसा के लिए उकसाने’ के प्रावधानों को जोड़ा जा सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हिंसा के लिए उकसाने को ही नफरत फैलाने वाले बयान के लिए एकमात्र मापदंड नहीं माना जा सकता। ऐसे बयान जो हिंसा नहीं फैलाते हैं उनमें भी समाज के एक हिस्से या किसी व्यक्ति को हाशिए पर धकेलने की संभावना होती है।

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