#oshtimes​वायु प्रदुशन – हर सांस मे लेते हैं मौत का पैगाम 

स्पेशल रिपोर्ट. संदीप सिंह – रांची 
हर सांस के साथ लेना पड़ रहा है फेफड़े को मौत का कण, जी हाँ ये सच है। रांची से महज दस किलोमिटर दूर मगध कोल माइंस परियोजना, जहां आवश्यक्ता से ज्यादा कोयले का भंडारन, जलते सुलगते कोयले से निकलता धुवां और गैस। वहां के ग्रामिण एवं किसानों के लिये ये किसी मौत का पैगाम से कम नहीं है।

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मगध सीसीएल प्रबंधन  के विशाल कोयला स्टॉक में पिछले एक माह से आग लगी है और चारों तरफ फैल गई है। पिछले माह जहां कोयले का एक छोटा ढेर सुलग रहा थाथे। वहि इस महिने इसका दायरा बहुत ज्यादा बढ़ गया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार फिलहाल मगध कोल परियोजना में लगभग २० लाख टन कोयले का स्टॉक जमा है। उत्पादन की तुलना में डिस्पैच नहीं होने के कारण स्टॉक दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। तेज धूप व हवाओं के कारण आग का बढ़ा दायरा प्रबंधन के लिए चिंता का कारण बन गया है। आग बुझाने के विभागीय प्रयास के बावजूद इस पर लगाम लगाने में प्रबंधन को सफलता नहीं मिल रही है। और मार्च माह होने के कारण कोयले का उत्पादन भी प्रबंधन बंद नहीं कर रही है। इस बीच लाखो टन कोयला जलकर खाक हो चुका है। एक अधिकारी के अनुसार कोयले में दहनशीलता के गुण के

कारण कोयले के स्टॉक में इस तरह का धुआ निकलने को विभागीय अधिकारी सामान्य बात बता रहे हैं। जबकि प्रदूषित हवा कई जहरीले घटकों का मश्रिण होती है, जिसमें ओजोन, सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, कार्बन

मोनोऑक्साइड और महीन कण (दस माइक्रॉन छोटे कणों को पीएम10 कहते हैं और इसी हिसाब से और छोटे जैसे पीएम2.5 होते हैं) शामिल होते हैं. जानकारो का मानना है कि कण जितने छोटे और महीन होंगे, सेहत को उतना ही नुक्सान होगा. आज रांची के आसपास कोयले खदानो से सटे गावो की हवा में अतिसूक्ष्मदर्शी पीएम2.5 कणों का उच्चतम स्तर मौजूद है जो फेफड़ों में

गहरे जाकर जम जाता है और वहां से रक्त प्रवाह का हस्सिा बन जाता है.

सिर्फ प्रति घन मीटर 10 ग्राम का इजाफा फेफड़ों में कैंसर की आशंका को आठ फीसदी तक बढ़ा सकता है, कार्डियोपल्मोनरी बीमारियों से होने वाली मौतों की आशंका को छह फीसदी और सभी मौतों की आशंका को चार फीसदी बढ़ा सकता है.
कंजर्वेशन ऐक्शन ट्रस्ट और अर्बन एमिशंस नामक स्वतंत्र शोध समूहों का किया एक ताजा अध्ययन बताता है कि 2030 तक कोयला जलाने से या कोयले भंडार से उठे प्रदूषण संबंधी मौत  दोगुनी या तिगुनी भी हो सकती हैं. 
आपको बताते चले कोयले का प्रदूषण सबसे कमजोर को अपना शिकार बनाता है. सबसे सीधा और आजीवन असर बच्चों पर होता है जिनकी सेहत के कई पहलू प्रभावित हो सकते हैं जिनमें याददाश्त और ज्ञानात्मक बोध भी है. इसके अलावा बूढ़ों, गर्भवती औरतों, श्वास संबंधी बीमारी से ग्रस्त लोगों, बाहर काम करने वाले लोगों, मजदूरों और बेघर लोगों को यह कहीं ज्यादा नुक्सान पहुंचाता है.

आयिये आपको दिखाते है कि मगध कोल भंडारन के समिप रह रहे गरिब किसानो का क्या कहना है! जहा सीसीएल प्रबंधन ने  गरिब किसानो के घर के बगल मे कोयले तका स्टाक कर दिया है और उसमे आग लग चुकि है।
फाइनल विओ:  बहरहाल कोल परियोजना हि नहि जब्कि कोयले कि ढुलायि कर रहे ट्रक और डम्फर मालिक भि सुप्रिमकोर्ट के आदेश को दरकिनार करते हुये बिना तिरपाल ढके कोयले कि ढुलायि करते चले आ रहे हैं, और गौर करने वालि बात ये है कि इस मामले मे प्रशाशन भि अपनि चुप्पि साधे हुये है! देखने वालि बात ये होगि कि क्या सीसीएल प्रबंधन और प्रशाशन प्रदुषन पर अंकुश लगा पाती है या फिर यु हि ग्रामिणो को घुटघुट कर मरने पर विवश छोड देती है!

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