‘वही लोग’ बच्चों का निवाला गटक गए

गिरिडीह। सरकारी विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन की देखरेख और संचालन की जिम्मेवारी स्थानीय लोगों को सौंपी गई है, ताकि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और नियमित रूप से मध्याह्न भोजन मिले, लेकिन जिन्हें यह जिम्मेवारी सौंपी गई थी, वही लोग बच्चों का निवाला गटक गए। जिम्मेवारी से मुक्त किए जाने के बावजूद इस मद के पैसे की अवैध निकासी कर आपस में बंदरबांट कर ली। इसके कारण बच्चों को काफी दिनों तक एमडीएम से वंचित रहना पड़ा। इसकी शिकायत के बावजूद विभागीय स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मामला जमुआ प्रखंड अंतर्गत मध्य विद्यालय पोबी का है।

क्या है मामला
उक्त विद्यालय को एमडीएम मद में उपलब्ध कराई गई राशि में से 1 लाख 26 हजार रुपए की अवैध निकासी करने की बात सामने आई है। बताया गया कि 6 दिसंबर 2016 को स्थानीय ग्रामीणों एवं प्रखंड से आए पदाधिकारियों के बीच विद्यालय प्रबंधन समिति का पुनर्गठन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से गंगाधर पांडेय को अध्यक्ष, बेबी देवी को उपाध्यक्ष व संगीता देवी को संयोजिका चुना गया। इसी के साथ पूर्व के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष व संयोजिका को बैंक खाता संचालित नहीं करने का निर्देश दिया गया। आरोप है कि पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार शर्मा व संयोजिका कलिया देवी ने बैंक खाता से चार बार में एमडीएम मद के 1.26 लाख रुपए की निकासी कर ली।
शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई
बताया गया कि अवैध निकासी की शिकायत जमुआ बीईईओ से की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद वर्तमान प्रधानाध्यापक व समिति के अध्यक्ष ने जिला शिक्षा अधीक्षक को आवेदन देकर पूरे मामले की जानकारी दी और कार्रवाई करने की मांग की। प्रधानाध्यापक ने बताया कि पूर्व के अध्यक्ष और संयोजिका द्वारा पैसे की अवैध निकासी कर लिए जाने के कारण राशि के अभाव में विद्यालय में काफी दिनों तक एमडीएम बंद रहा। जिला से पुन: राशि उपलब्ध कराने पर गत 20 मार्च से इसका संचालन शुरू किया गया है।
अब तक नहीं हुई जांच
बता दें कि जिला शिक्षा अधीक्षक कमला सिंह ने 18 फरवरी 2017 को तीन दिनों के अंदर उक्त मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने का निर्देश संबंधित बीईईओ को दिया था, लेकिन एक माह से अधिक हो जाने के बाद भी अब तक न तो मामले की जांच हुई है और न ही कोई कार्रवाई। इधर, बीईईओ गौतम सिंह ने बताया कि एक बार मामले की जांच की गई है, जिसमें 32 हजार रुपए की अधिक निकासी की बात सामने आई। इसमें से पूर्व अध्यक्ष ने 15 हजार रुपया जमा कर दिया है। शेष 17 हजार भी शीघ्र जमा करने की बात कही है। व्यस्तता की वजह से जांच रिपोर्ट डीएसई को नहीं दे पाए हैं।

Advertisements