झारखण्ड में गर्मी से पहले ही पानी के लिए मचा हाहाकार

संदीप सिंह।

इस गर्मी एक बार फिर तरसायेगी पानी की प्यास।ग्रामीण इलाक़ो में ख़ास कर रांची से सटे आस पास के जिलों और प्रखंड में  गर्मी आने से पूर्व ही कुएं और तालाब सूखने लगे है।ग्रामीणों को झेलनी हो रही है परेशानी।नहीं दिख रही है कोई व्यवस्था।
एक रिपोर्ट

वीओ1….इस कुएं के अंदर पानी को तरसती बाल्टी से राज्य में पड़ रही भीषण गर्मी का अंदाजा लगाना शायद काफी होगा।लेकिन ऐसा नहीं है।क्योंकि अभी महज़ गर्मी की आहट हुई है।और ये नज़ारा है राजधानी रांची से महज़ 90 किलोमीटर दूर  के गाओं की है। जहाँ गर्मी की सिर्फ एक दस्तक ने लोगों के पसीने छुड़ा दिए हैं।और पानी की ज़रुरत ने उन्हें पानी पानी कर दिया है।वहीँ लोगों को सरकारी स्कूल परिसर में लगे चापानल पर ही निर्भर होना हो रहा है और ओ पानी भी पिने योग्य नहीं है क्योंकि ये पानी पूर्णरूप से गंधकयुक्त है। क्योंकि इलाके के ज़्यादातर कुएं और तालाब सूखने की कागार पर है।और अहले सुबह से ही ग्रामीणों की पानी को लेकर जद्दोजेहद शुरू हो जाती है।

बाइट…ग्रामीण महिला
वहीँ मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि हाल के सालों  में बारिश में कमी आयी है।जिसकी वजह से पानी की कमी हुई है।हालांकि उन्हें उम्मीद है कि अप्रैल से जून के महीनों में बारिश होगी और तालाब और कुएं में पानी की कमी की भरपाई होगी। 
बाइट…ए वदूद,मौसम वैज्ञानिक…बहरहाल मौसम वैज्ञानिक का अनुमान तो है कि मौसम में परिवर्तन आएगा और बारिश से पानी की भरपाई होगी।लेकिन फिलहाल तो ग्रामीण इलाक़ो में  पानी के लिए हाहाकार दिखने लगा है।जो की आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी परेशानी है। अब देखना है कि राज्य सरकार के द्वारा बनाये गए डोभा योजना और शहरों में वाटर वेस्टेज फ़िल्टर टंकी से राज्य की जनता को कितना निजात मिल पाता है।

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