#जीआरएपीईएस 3 प्रयोग से सौर तूफानों को ठीक ढंग से निर्धारित करने हेतु उन्नत किया जायेगा

ऊटकमंड (ऊटी) में स्थित टीआईएफआर के कॉस्मिक रे प्रयोगशाला में द ग्रेप्स -3 प्रयोग (जीआरएपीईएस 3) का उन्नयन किया जा रहा है। जीआरएपीईएस-3 म्यूऑन (एक उप परमाणु कण) से वैज्ञानिकों ने 22 जून 2015 को वातावरण में छाए रहे आकाशगंगा के ब्रह्मांडीय किरणों के विस्फोट को रिकॉर्ड किया था।

यह अपग्रेड सूर्य से पृथ्वी की ओर की अपनी यात्रा के ‘लास्ट मिलियन मील’ (एल -1 बिंदु से) में तूफान के प्रचार के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। अपग्रेड डिटेक्टर के पास आकाश का बढ़िया और अधिक कवरेज होगा और इसके पास कॉस्मिक किरणों की दिशा निर्धारित करने के लिए बेहतर क्षमता होगी।

इसका उत्तरवर्ती गुण, पहचाने गए कणों की दिशा को समझने में सक्षम होने के कारण, यह विश्व में ब्रह्मांडीय रे डिटेक्टरों में स्वयं को अनोखा बनाता है; यह कणों की तीव्रता को भी माप सकता है। चूंकि बढ़ी हुई सुविधा व्यापक दृश्य क्षेत्र को दिखा रही है (वर्तमान में 37% से 57% तक), इससे सौर तूफान को खोजने की संभावना अधिक होगी।

सूरज पृथ्वी से 150 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर है, और उपग्रह लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर रखे गए हैं, जोकि एल 1 बिंदु के रूप में जाना जाता है, जहां वे पृथ्वी के साथ सूर्य की कक्षा में परिक्रमा करते हैं।

चूंकि एक सौर तूफान से चार्ज किए गए कण पृथ्वी पर टकरने से पहले उपग्रहों को प्रभावित करेंगे, अतः ये एक प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के रूप में कार्य करते हैं। तूफान की गति के अनुसार, एल 1 बिंदु से पृथ्वी पर पहुंचने में लगभग 20-40 मिनट लगेगा। हालांकि, जीआरएपीईएस -3 सैटेलाइट द्वारा लगाए अनुमान से भिन्न हो सकते हैं।

क्या है सौर तूफान?

सूर्य की सतह पर अचानक बेहद चमकदार प्रकाश दिखने की घटना को सन फ्लेयर कहा जाता है। धरती से ऐसा हर रोज नहीं दिखाई पड़ता। कभी कभार होने वाली इस घटना के दौरान सूर्य के कुछ हिस्से असीम ऊर्जा छोड़ते हैं। इस ऊर्जा से एक खास चमक पैदा होती है जो आग की लपटों जैसी नजर आती है।

अगर यह असीम ऊर्जा लगातार कई दिनों तक निकलती रहे तो इसके साथ सूर्य से अति सूक्ष्म नाभिकीय कण भी निकलते है। यह ऊर्जा और कण ब्रह्मांड में फैल जाते हैं। असल में यह बहुत जबरदस्त नाभिकीय विकीरण है, जिसे सौर तूफान भी कहा जाता है।

सौर तूफान राह में आने वाली हर चीज पर असर डालता है। अगस्त 2014 के अंत में शुरू हुए सौर तूफान की दिशा फिलहाल पृथ्वी की तरफ नहीं है। लेकिन नासा ने चेतावनी दी है कि इस साल के अंत में एक सौर तूफान पृथ्वी की तरफ आएगा।

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