#17.5 करोड़ डॉलर की जलविज्ञान परियोजना को वर्ल्ड बैंक ने दी मंजूरी 

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>विश्व बैंक ने 17.5 करोड़ डॉलर की एक परियोजना को अपनी मंजूरी दे दी है जिससे संस्थानों को अपने क्षेत्रों में जल की स्थिति का आकलन करने में बहुत मदद मिलेगी और बाढ़ व सूखे को लेकर संवेदनशीलता की स्थिति भी घटेगी। राष्ट्रीय जलविज्ञान (हाइड्रोलॉजी) परियोजना अब एचपी-एक और एचपी-दो के तहत हासिल सफलता को बहुत आगे बढ़ाएगी, जिससे पूरे देश को इसके दायरे में लाया जा सके। इसमें गंगा और ब्रह्मपुत्र बराक बेसिन के राज्य भी पूरी तरह आएंगे।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>वाशिंगटन मुख्यालय वाले विश्व बैंक ने अपने बयान में यह कहा कि यह परियोजना हाइड्रोलॉजी परियोजना-एक और हाइड्रोलॉजी परियोजना दो की सफलता पर बहुत ही आगे बढ़ाई गई है, जिसके तहत दो बड़ी नदी प्रणालियों (कृष्णा-सतलज व्यास) में तत्काल आधार पर बाढ़ की भविष्यवाणी की एकीकृत प्रणाली तथा मौसम के अनुमान को पूरी तरह एकीकृत किया जाएगा।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना:

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>06 अप्रैल, 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा ‘राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना’ (National Hydrology Project) के कार्यान्वयन को मंजूरी प्रदान की गयी। यह 3679.7674 करोड़ रुपये की लागत के साथ एक केंद्रीय योजना होगी जिसमें 3640 करोड़ रु. ‘राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना’ हेतु और 39.7674 करोड़ रुपये ‘राष्ट्रीय जल सूचना विज्ञान केंद्र’ (NWIC) के लिए होगा।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>इस परियोजना में जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय के नियंत्रण के अधीन एक स्वतंत्र संगठन के रूप में ‘राष्ट्रीय जल सूचना विज्ञान केंद्र’ की स्थापना का प्रावधान है।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>उल्लेखनीय है कि ‘राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना’ से जल मौसम संबंधी आंकड़ों को एकत्र करने में मदद मिलेगी जिसका संग्रहण एवं विश्लेषण वास्तविक समय आधार पर होगा। इस परियोजना के तहत संपूर्ण देश को आच्छादित किए जाने की परिकल्पना की गयी है जबकि पहले की जलविज्ञान परियोजनाओं के तहत केवल 13 राज्यों को आच्छादित किया गया था।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना के प्रस्ताव के भाग हैं:

  • यथावत जल-मौसम निगरानी प्रणाली तथा जल-मौसम डाटा अधिग्रहण प्रणाली
  • राष्ट्रीय जलसूचना विज्ञान केंद्र की स्थापना
  • जल संसाधन संचालन एवं प्रबंधन प्रणाली
  • जल संसाधन संस्थान एवं क्षमता निर्माण

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना के प्रर्वतन के परिणामों में शामिल हैं: राष्ट्रीय जल सूचना विज्ञान केंद्र के माध्यम से आंकड़ों का भंडारण, आदान-प्रदान, विश्लेषण एवं प्रचार-प्रसार। बाढ़ जलमग्न क्षेत्रों का मानचित्रण। भारत सरकार की प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना एवं अन्य योजनाओं के बेहतर नियोजन एवं आवंटन हेतु नदी घाटी में सतह एवं भूमिगत जल संसाधनों का आकलन आदि।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>गौरतलब है कि राष्ट्रीय जलविज्ञान परियोजना के कुल आबंटन में से 50 प्रतिशत राशि (1839.8837 करोड़ रुपये) विश्व बैंक से ऋण के रूप में प्राप्त होंगे। शेष 50 प्रतिशत राशि (1839.8837 करोड़ रुपये) बजटीय समर्थन से केंद्रीय सहायता के रूप में मिलेगी।

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