#यूएन वीमेन का वीमेन इन पॉलिटिक्स 2017 मैप जारी 

भारतीय महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरूषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं। चाहे वो बिजनेस हो या फिर राजनीति हर क्षेत्र में महिलाओं में अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया है। इसी बीच यूएन ने संसद में भारतीय महिलाओं की भागीदारी पर एक रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक संसद में महिलाओं की भागीदारी में भारत 148वें स्थान पर है। 15 मार्च 2017 को जारी की गई इस लिस्ट में 193 देशों को शामिल करके एक आंकड़ा तैयार किया गया है।

भारतीय संसद में महिलाएं:

वर्तमान समय में भारत की लोकसभा सदस्य की कुल तादाद 542 है। इनमें 64 महिलाएं हैं। इस तरह उनकी हिस्सेदारी 11.8% है। इसके साथ ही 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में 27 महिला सांसद हैं। इस तरह उनकी हिस्सेदारी 11% है। महिला मंत्रियों की बात की जाए तो कैबिनेट में उनकी हिस्सेदारी 18.5% है। इस मामले में भारत 88वें नंबर पर है।

भारत को छोड़कर अगर पूरे विश्व की बात की जाए तो दुनिया भर के संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी साल 2016 तक 23.3% थी। हालांकि भारत में यह कुल मिलाकर 11 फीसदी ही है। यानि की पूरे विश्व के मुकाबले 50 फीसदी।

संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी के मामले में रवांडा 61.3% पहले नंबर पर है। 53.1% के साथ बोलिविया दूसरे। 48.9% के साथ क्यूबा तीसरे नंबर पर है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के पड़ोसी मुल्कों की स्थिति ज्यादा बेहतर मानी जा रही है। रिपोर्ट में भारत को 148वां स्थान मिला है जबकि पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को 89 वां और नेपाल को 48वां स्थान दिया गया है। इसके अलावा श्रीलंका 179वें नंबर पर हैं।

हाल ही में संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी को लेकर इंटर-पार्लियामेंट्री यूनियन (IPU) की ओर से एशिया लेबल पर ‘वुमन इन पार्लियामेंट 2016: द ईयर इन रिव्यू’ नाम से लिस्ट जारी हुई थी। इसके मुताबिक, एशिया में पार्लियामेंट में महिलाओं का रिप्रेजेंटटेशन 0.5% बढ़ा है। 2015 में यह 18.8% था, जो 2016 में बढ़कर 19.3% हो गया।

IPU की रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया में केवल भारत इस मामले में पिछड़ गया। 1994 में लोकल चुनावों में महिलाओं के लिए सीटों के रिजर्वेशन की शुरुआत की गई। हालांकि, 2008 में एक प्रपोज्ड कॉन्स्टिट्यूशनल अमेंडमेंट (संशोधन) बिल पेश किया गया, जिसका मकसद नेशनल लेवल पर महिलाओं के लिए रिजर्वेशन तय करना था, लेकिन संसद में हुई चर्चा में इस टॉपिक पर गतिरोध बना रहा।

आईपीयू के सक्रेटरी-जनरल मार्टिन चुंगोंग ने कहा कि महिलाओं को रिजर्वेशन दिया जाना चाहिए। इससे जेंडर इक्वालिटी को बढ़ावा मिलेगा।

Advertisements