शत्रु संपत्ति संशोधन बिल पास हुआ

  • शत्रु संपत्तियों पर उत्तराधिकार के दावों पर स्थायी तौर पर लगाम लगने का रास्ता साफ हो गया है। संसद ने लंबे समय से लंबित शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। राज्यसभा में यह विधेयक पहले ही पास हो चुका है और लोकसभा ने 14 मार्च 2017 को ध्वनिमत से इसे पारित कर दिया। संसद में लंबित रहने के दौरान विधेयक की वैधानिकता को बनाए रखने के लिए सरकार को पांच बार अध्यादेश जारी करना पड़ा था।
  • विधेयक पास होने के बाद राजा महमूदाबाद समेत लगभग एक लाख करोड़ रुपये की शत्रु संपत्तियों पर उत्तराधिकार की दावेदारी खत्म हो जाएगी। लोकसभा में विधेयक पर विपक्ष की आशंकाओं का जवाब देते हुए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि संशोधित कानून से शत्रु संपत्ति का उपयोग कर रहे किरायेदारों पर कोई असर नहीं होगा। उनका अधिकार किरायेदार कानून के तहत सुरक्षित रहेगा।
  • 49 साल पुराने शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के संशोधन विधेयक, 2016 के तहत वो संपत्ति आती है जिसका रखरखाव या जिसके मालिक या फिर प्रबंधन कोई दुश्मन देश, दुश्मन देश का नागरिक या फिर दुश्मन देश की कंपनी करती हो। केंद्र सरकार ने अब कानूनन ऐसे किसी भी दुश्मन (अमूमन पाकिस्तान और चीन) संपत्ति से उस देश के नागरिकों के उत्तराधिकार के दावों को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है।
  • भारत में ऐसे विवादास्पद संपत्ति के हालात भारत-पाक युद्ध (1965) के बाद बने थे। इसीलिए इस अधिनियम को पहली बार 1968 में लागू किया गया था। जो ऐसी संपत्तियों को कानूनी दायरे में रखता था।
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