भारत यूएन (सीएलसीएस) में अपनी उपस्थिति खोने की कगार पर

भारत, दो दशकों में पहली बार, एक प्रतिष्ठित, यू.एन. वैज्ञानिक निकाय में सदस्य नहीं होगा जोकि यह फैसला लेने में सक्षम है कि समुद्री किनारे के कुछ हिस्सों को विशेष रूप से तेल, कीमती धातुओं और खनिजों जैसे प्राकृतिक संसाधनों के लिए खनन किया जा सकता है।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>समस्या उत्पन्न होने का प्रमुख कारण:

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>भारत 21 सदस्यीय निकाय कानूनी महाद्वीपीय शेल्फ (सीएलसीएस) का एक सदस्य एवं यूनाइटेड नेशन्स कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ़ सी (यूएनसीएलओएस) का हिस्सेदार है। लेकिन, इस साल भारत ने इस निकाय में आगामी चुनावों के लिए कोई उम्मीदवार नहीं खड़ा करने का फैसला किया है।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>इसके बजाय, विदेश मंत्रालय (एमईए), जोकि औपचारिक रूप से भारतीय उम्मीदवारों को नामांकित करता है, ने एक अन्य यू.एन. निकाय इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ़ सी (आईटीएलओएस) में एक व्यक्ति को नामांकित करने का फैसला किया है।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>इस कदम के प्रभाव:

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>सीएलसीएस का कार्यकाल पांच साल का है और इसके लिए वर्ष 2017-2022 अवधि के लिए जून में चुनाव होने हैं। इस 21-सदस्यीय समूह में किसी भी भारतीय के नहीं होने का मतलब यह होगा कि चीन और पाकिस्तान तथाकथित रूप से एशिया-प्रशांत समूह को आवंटित की गई पांच सीटों में से दो सीटों पर कब्जा कर सकता है।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>सीएलसीएस की सदस्यता भारत के लिए महत्वपूर्ण क्यों है?

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>सांकेतिक प्रतिष्ठा के अलावा, आयोग की सदस्यता से भारत को सागर के कुछ भागों में देशों द्वारा किये गए दावों जैसे क्षेत्रीय जल का अक्सर सीमारेखन करना कठिन होता है, की वैज्ञानिक क्षमता का पता लगाने के लिए अनुमति मिलती है। ऐसी जानकारी केवल प्रतिभागियों के लिए है।

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p style=”color:rgb(0,0,0);font-family:sans-serif;font-size:medium;”>भारत की सीएलसीएस में बहुत रुचि है और इसलिए भारत ने मौजूदा 200 समुद्री मील से 350 नॉटिकल मील तक अनन्य आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) का विस्तार करने के लिए आवेदन किया है।

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