गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां सोने  के बदले अब सिर्फ 25  हजार  तक ही ऋण नगद दे सकेगी

  • गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) अब सोने के बदले 25 हजार रुपये से ज्यादा ऋण नकद में नहीं दे सकेंगी। रिजर्व बैंक ने 09 मार्च 2017 को यह स्थिति स्पष्ट की.जबकि इससे पहले एनबीएफसी को सोने के एवज में दिए जाने वाले ऋण में एक लाख रुपये तक नकद देने की अनुमति थी। इससे अधिक की राशि का भुगतान चेक से किया जा सकता था।
  • गौरतलब है कि आयकर कानून 1961 के अनुसार 20 हजार रुपये तक का लेनदेन नकद में अनुमति योग्य है। इसलिए एनबीएफसी के लिए ऋण के रूप में दी जाने वाली नकद राशि की सीमा के प्रावधान में  बदलाव किया गया है। अब रिजर्व बैंक ने आयकर कानून के प्रावधानों की तर्ज पर अब एक लाख रुपये की यह सीमा घटाकर 25 हजार रुपये कर दी है। सरकार जिस तरह से नकदरहित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रही है, उसको देखते हुए यह कदम बहुत महत्वपूर्ण है।
  • स्मरण रहे कि सरकार ने काले धन पर रोक लगाने, जाली मुद्रा और आंतकी वित्त पोषण को रोकने के लिए पिछले साल आठ नवंबर को 500 और 1000 के पुराने नोटों को चलन से बाहर कर दिया था। इस दौरान आरबीआई ने बैंक शाखाओं और एटीएम से नकदी की निकासी पर कई प्रतिबंध लगाए थे। जब हालात सुधरने के बाद इनमें से अधिकांश को हटा लिया था। 13 मार्च से बचत खाते से नकद निकासी की सीमा भी खत्म कर दी जाएगी।
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